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    लोन डिफॉल्ट गाड़ियों को खरीदना कितना सेफ है? पूरी जानकारी पढ़ें

    भारत में ऑटोमोबाइल नीलामी का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है, खासकर जब बात आती है “लोन न चुकाए गए वाहनों” यानी उन गाड़ियों की जिन्हें बैंक या फाइनेंस कंपनी ने लोन डिफॉल्ट के कारण जब्त कर लिया हो। ऐसे वाहनों को बैंक या NBFC कंपनियाँ नीलामी के माध्यम से फिर से बेचती हैं। सवाल यह है — क्या ऐसे वाहनों को खरीदना सुरक्षित है?

    इस ब्लॉग में हम इसी सवाल का विस्तृत जवाब देंगे — पूरी प्रक्रिया, फायदे, जोखिम और ज़रूरी सावधानियाँ जानेंगे ताकि आप एक समझदार और सुरक्षित फैसला ले सकें।


    लोन डिफॉल्ट गाड़ियाँ होती क्या हैं?

    जब कोई व्यक्ति या कंपनी बैंक या NBFC से लोन पर गाड़ी लेता है और फिर उसे चुकाने में असफल रहता है, तो फाइनेंस कंपनी उस गाड़ी को जब्त कर लेती है। इसके बाद, गाड़ी को “Repossessed Vehicle” या “Loan Not Repaid Vehicle” कहा जाता है। इन गाड़ियों को बाद में बैंक नीलामी में बेच देता है ताकि नुकसान की कुछ भरपाई हो सके।


    क्या ऐसी गाड़ियाँ खरीदना फायदेमंद है?

    हां, अगर सावधानी बरती जाए तो यह काफी फायदेमंद हो सकता है।
    ऐसे वाहन अक्सर कम समय के लिए उपयोग में आए होते हैं और कुछ मामलों में अच्छे कंडीशन में होते हैं। कई बार गाड़ी की सर्विसिंग भी कंपनी रिकॉर्ड में होती है, और इंश्योरेंस भी एक्टिव रहता है।


    सेफ्टी फैक्टर: क्या भरोसा किया जा सकता है?

    यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस सोर्स से गाड़ी खरीद रहे हैं:

    ✅ बैंक या NBFC द्वारा अधिकृत नीलामी प्लेटफॉर्म से खरीद रहे हैं तो – सेफ।
    ✅ वाहन के डॉक्युमेंट्स और ओनरशिप ट्रांसफर सही तरीके से हो रहा है तो – सेफ।
    ❌ किसी अनजान या अनाधिकृत एजेंट से खरीद रहे हैं तो – रिस्की।

    इसलिए हमेशा अधिकृत वेबसाइट या पोर्टल से ही बोली लगाएं।


    इन ब्रांड्स की गाड़ियाँ आमतौर पर नीलामी में देखने को मिलती हैं:

    • Maruti Suzuki
    • Hero
    • Tata Motors
    • Kia
    • Hyundai
    • Honda
    • Bajaj
    • Mahindra

    इन ब्रांड्स की गाड़ियाँ आमतौर पर डिमांड में होती हैं और लोन डिफॉल्ट मामलों में नीलामी के ज़रिए बेची जाती हैं।


    ऐसी गाड़ी खरीदने से पहले क्या जांचें?

    1. RC और इंश्योरेंस की वैधता
    2. इंजन और चेचिस नंबर का मिलान
    3. सर्विस रिकॉर्ड
    4. गाड़ी की फिजिकल कंडीशन (जैसे टायर, ब्रेक, लाइट, गियर)
    5. Odometer रीडिंग
    6. कोई पेंडिंग चालान या केस तो नहीं

    प्रक्रिया कैसे होती है?

    1. बैंक/NBFC अपनी वेबसाइट या अधिकृत पोर्टल पर नीलामी लिस्ट जारी करता है।
    2. इच्छुक खरीदार रजिस्ट्रेशन कर के KYC डॉक्युमेंट्स जमा करता है।
    3. एक छोटी सी रिफंडेबल अमाउंट देकर बिडिंग में हिस्सा लेता है।
    4. बिड जीतने पर भुगतान कर के गाड़ी अपने नाम ट्रांसफर करवाई जाती है।

    बोनस पॉइंट: EMI ऑप्शन भी होता है!

    कुछ पोर्टल EMI पर भी वाहन देते हैं — खासकर उन खरीदारों के लिए जो नीलामी से गाड़ी खरीदना तो चाहते हैं लेकिन एक साथ पेमेंट नहीं कर सकते।


    जोखिम क्या हो सकते हैं?

    • गाड़ी में छुपी हुई कोई खराबी हो सकती है (यदि अच्छे से जांच न करें)
    • ट्रांसफर प्रक्रिया में देरी
    • पेंडिंग टैक्स या चालान की जानकारी छुपाई जा सकती है (इसलिए दस्तावेज़ जांचें)

    इन्हें बचाने के लिए आप एक भरोसेमंद मैकेनिक से गाड़ी चेक करवा सकते हैं और बैंक से लिखित में क्लियरेंस मांग सकते हैं।


    निष्कर्ष: खरीदें या नहीं?

    अगर आप एक भरोसेमंद स्रोत से, पूरी जानकारी के साथ और सावधानीपूर्वक जांच कर के लोन डिफॉल्ट गाड़ी खरीदते हैं — तो यह एक शानदार डील साबित हो सकती है। न सिर्फ पैसों की बचत होती है, बल्कि आपको एक अच्छी कंडीशन की ब्रांडेड गाड़ी भी मिल सकती है।

    बस ध्यान रखें — सही चैनल चुनें, डॉक्युमेंट्स की जांच करें और भावनाओं में बहकर फैसला न लें।

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